Sunday, September 21, 2014

Subjugation: Harjeet's abduction and custodial death gets justice after 24 years (Episode 419, 420 on 20th, 21st Sep 2014)

Subjugation
दमन


आज से चौबीस साल पहले, सन 1989
पंजाब का सिमी झन्डा गाँव जहाँ के गाँव वाले पीड़ित है पुलिस की गुंडागर्दी से. पुलिस वहां के किसी भी व्यक्ति को उठा लेती है और बेवजह सिर्फ शक की बिनाह पर उनको बुरी तरह से मारती पीटती है और अरेस्ट कर के ले जाती है. उसके पास बहुत से बहाने होते हैं व्यक्ति के परिजनों को बताने के लिए जैसे की इस व्यक्ति पर उग्रवादी होने का शक है या ये उग्रवादियों से सम्बन्ध रखता है. इसी बहाने पुलिस वाले इस व्यक्तियों के परिजनों से मोती रकम वसूलते हैं अपनी जेबें भरने के लिए.

Kuljit Singh Dhatt aka Harjeet Rajawat
 Kuljit Singh Dhatt
or Harjeet Rajawat
हरजीत राजावत भी गाँव का एक जागरूक व्यक्ति है. वो एक बार पाने सामने पुलिस को एक व्यक्ति की पिटाई करते देखता है. वो पुलिस वालों को बोलता है की बिना किसी सबूत, या ऍफ़.आई.आर. के बिना वो लोग किसी को इतनी बेरहमी से कैसे मार सकते हैं. इसी तरह से जीत कई लोगों को पुलिस का चंगुल से बचाता है. पुलिस उसको धमकी देती है की वो इस तरह से मामलों में बीच में ना आये वरना उसके साथ भी बुरा होगा.

जीत ये तय करता है की वो गाँव से सरपंची का चुनाव लड़ेगा. जीत गाँव का सरपंच बन जाता है. वो लोगों को पुलिस से जुर्म के विरुद्ध जागरूक करता है. साथ ही साथ वो आसपास के गाँव के लोगों को भी जागरूक करता है. वो बाकी गाँव के सरपंच को साथ लेकर पुलिस से मिलता है और पुलिस को समझाता है की अगर पुलिस को किसी पर शक है तो वो कानून के दायरे में रह कर ही कार्यवाही करे.

पुलिस के लिए जीत एक रस्ते का काँटा बनता जा रहा है. इसी दौरान पुलिस के सामने एक हत्या का केस आता है और वो हत्या के शक के बिनाह पर जीत को गिरफ्तार कर लेते हैं और बहुत निर्दयता से मारते हैं.

Twenty four years ago in 1989
Simi Jhanda Village, Punjab. Villager are infested of hooliganism of police. Police arrests any of the villager as suspects and tortures him until his family does not pay some amount for his release. Police arrests them on behalf of suspect of being a Militant. They never files any FIR or a complaint against that person and starts torturing him directly.

Harjeet is one of the villagers who is a literate person also knows the process of arresting a suspect. A day he stops police from beating a villager. Police constable says that he is a suspect but Jeets starts asking him copy of FIR or complain. Same kind of things happens many times and finally Harjeet becomes a thorn in the eyes of police. They decides to teach him a lesson.

On the other hand Harjeet becomes Sarpanch of the village. He creates awareness in the villagers about activities of police, he also explains illegal activities of police to villages in neighborhood.

Finally police arrests Harjeet after making of accused of a recent murder in the village. They tortures him brutally and later tells his family that Harjeet has runaway and he is now dead.

Based on 1989 case of Kuljit Singh Dhatt who was also a nephew of Shaheed Bhagat Singh's Sister. He was picked up by the Punjab police and later eliminated. Kuljeet’s abduction was conspired by five policemen and he was later eliminated. It is still not confirm what they did with his body. Kuljeet’s elder bother Harbhajan Singh Dhatt is son-in-law of Shaheed Bhagat Singh’s youngest sister Prakash Kaur. Kuljeet was arrested by the police in the midnight of 25th and 26th January 1989 and FIR was logged after 2 days of arrest. In the FIR, it was mentioned that Kuljeet has confessed of having hidden a load of weapons and ammunition on the banks of the river Beas. According to FIR, Kuljeet brought them to the weapons and jumped into the river after breaking the chain.

In 1990, Kuljeet’s wife and Prakash Kaur headed towards Supreme Court which constituted a enquiry commission. This commission submitted their report in 1993 which indicated of abduction and elimination of Dhatt. They were later booked for criminal conspiracy, abduction and illegal confinement. The case remained pending in the court for near 14 years and Prakash Kaur, who was Canada-based moved to supreme court for early hearing. During this two of the accused were already passed away.

On 9th May, 2014 court sentenced the three accused to five-year rigorous imprisonment under section 364 of IPC and a fine of 2.1 lac each.

Prakash Kaur Passes Away:
Prakash Kaur was youngest among nine siblings of Shaheed Bhagat Singh. She took her last breath on 28th September, 2014 which was also 107th birth anniversary of Shaheed Bhagat Singh. Prakash Kaur was shifted to Canada during hearings of the case and was living with his son Rupindar Singh Mali. She was paralyzed from last six years.
Prakash was born during 1921 and she was 12 year old when Bhagat Singh, Sukhdev and Rajguru were hanged to death by British on that historic date of March 23rd, 1923.

Prakash was married to Harbans Singh Malhi of 5 NN village in Padampur tehsil of Ganganagar district in Rajasthan. Her husband was died before 15 years. According to Kuljeet’s bother Harbhajan, Prakash fought for justice throughout 25 years and also filed a petition of reconsideration of punishment of three accused in Punjab and Haryana high courts.

ये कहानी आज से 25 पहले होशियारपुर निवासी कुलजीत सिंह दत्त पर आधारित है. कुलजीत को पांच पुलिस वालों द्वारा गायब कर दिया गया था जिसके बाद उसे मार दिया गया और लाश किसी को सौंपी गई यहाँ तक की किसी को पता भी नहीं चला की लाश का हुआ क्या. कुलजीत के बड़े भाई हरभजन सिंह दत्त्त शहीद भगत सिंह की सबसे छोटी बहन प्रकाश कौर के दामाद हैं.

कुलजीत को 25 और 26 जनवरी की मध्यरात्रि को पुलिस ने अरेस्ट किया था और लोगों के 2 दिन बाद ऍफ़ आई आर दर्ज करी. ऍफ़ आई आर में ये लिखा गया की कुलजीत ने ये क़ुबूल किया था की उसके पास हथियार और गोल बारूद था जो की उसने व्यास नदी के तट पर छिपा दिए थे. पुलिस के अनुसार कुलजीत उनलोगों को हथियार तक ले गया था और वही पर वो हथकड़ी तोड़ कर नदी में कूद कर भाग गया.

1990 में प्रकाश कौर और कुलजीत की पत्नी ने इन्साफ के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और इसके बाद इन्क्वारी कमीशन बिठाई गई और 1993 में इस कमीशन ने रिपोर्ट को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जिसके बाद पांच पुलिस वालों को दोषी ठहराया गया. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इन पुलिस वालों के खिलाफ केस को रजिस्टर किया. इन पुलिस वालों को आपराधिक साजिश, अपहरण और अवैध कारावास के आधार बुक किया गया.

ये केस करीब 14 साल तक हाई कोर्ट में पड़ा रहा. प्रकाश कौर जो की कनाडा निवासी हैं, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया ताकि केस पर तेजी से काम हो सके. इसी बीच इस केस के दो आरोपियों की मृत्यु भी हो गई और 9 मई 2014 को तीन बचे आरोपियों को कोर्ट ने पांच साल की कैद और 2 लाख, 10 हज़ार रुपये जुरमाने की सजा दी.

प्रकाश कौर की मृत्यु
प्रकाश कौर शहीद भगत सिंह के नौ भाई बहनो में सबसे छोटी थी जिनका देहांत 98 उम्र में ब्राम्प्टन,कनाडा में 28 सितम्बर, 2014 को हो गया जो की शहीद भगत सिंह की 107वि जयंती भी थी. प्रकाश कौर इस केस के दौरान ही कनाडा शिफ्ट हो गई थी और अपने बड़े बेटे रुपिंदर सिंह माली के साथ रह रही थी. प्रकाश कौर करीब पिछले छेः साल से पैरलाईज़्ड थी. प्रकाश कौर का जन्म 1921 में हुआ था और जब भगत सिंह को जेल हुई तब वो सिर्फ 12 साल की थी.

प्रकाश कौर की शादी राजस्थान के गंगानगर डिस्ट्रिक्ट के पदमपुर गांव निवासी हरभान सिंह माली से हुई थी और वो कनाडा शिफ्ट हो गए थे. उनकी मृत्यु करीब पंद्रह साल पहले हो चुकी है. हरभजन सिंह के अनुसार प्रकाश कौर ने ये केस पूरे 25 साल तक लड़ा और इस केस का फैसल आने के बाद भी फैसले की सज़ा बढ़ाने की अपील पंजाब और हरयाणा कोर्ट में करी थी.

YouTube:
Part 1: http://youtu.be/TH6hEvNvb30
Part 2: http://youtu.be/9IlJ8qS_R3Y

SonyLiv:
Part 1: http://www.sonyliv.com/watch/thriller-ep-419-september-20-2014
Part 2: http://www.sonyliv.com/watch/thriller-ep-420-september-21-2014

Here is the inside story of the case:
http://thrill-suspense.blogspot.com/2014/09/crime-patrol-25-yrs-after-dhatts-murder.html


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