Tuesday, November 11, 2014

Parkstreet Kolkata Gang Rape Case: Vicitim Suzette Jordan revealed her identity



कोलकाता पार्क स्ट्रीट सामूहिक बलात्कार पीड़ित सुज़ैट जॉर्डन का 13 मार्च, 2015 निधन हो गया. 40 वर्षीय सुज़ैट दो बेटियों की एक माँ थी जो कि पिछले तीन दिनों से अस्पताल में थी. वह मेनिंगो-एन-सेफेलाइटिस नाम की बीमारी से पीड़ित थी.

मेनिंगो-एन-सेफेलाइटिस अक्सर वायरल संक्रमण से बल्कि अन्य रोगजनक जीवों द्वारा और कभी-कभी अन्य स्थितियों, जैसे जहर, ऑटोइम्यून विकार की वजह से मस्तिष्क पैरेन्काइमा की सूजन की बीमारी है

40 year old Kolkata Park Street Gang Rape victim Suzette Jordan passed away on March 13, 2015. A single mother of two daughters was in the hospital from last three days. She dies of a disease called Meningoencephalitis.

Meningoencephalitis is inflammation of the brain parenchyma, often caused by viral infections but also by other pathogenic organisms and occasionally by other conditions, eg toxins, autoimmune disorders.

फ़रवरी 2012 की उस रात ​सुज़ैट जॉर्डन ​अपनी कुछ दोस्तों के साथ कोलकाता के एक फाइव स्टार होटल के एक नाईट क्लब में गई थी, और उसी रात उसको एक कार से निचे फेक दिया गया. वो घायल थी, उसकी हालत ख़राब थी, उसके कपडे फटे हुए थे. मगर जल्दी ही उसके साथ हुई ये वीभत्स घटना ने राजनीतिक रूप ले लिया. यहाँ तक की बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ये तक कह डाला की ये एक झूठी, मनघडंत घटना है. मंत्रियों ने कार्यवाही करने के बजाये जॉर्डन के चरित्र पर ऊँगली उठाना शुरू कर दिया. उनके हिसाब से जॉर्डन कैसी माँ है जो आधी रात को घर से बाहर थी.… !!


​करीब पंद्रह महीने तक जॉर्डन एक परछाई के रूप में जानी गई जिसका कोई नाम नहीं था और जिसको हर कोई पार्क स्ट्रीट पीड़िता के नाम से ही जानता था. मगर वो लोग जो उसके करीबी थे उसकी परछाई से भी उसे पहचान सकते थे की असल में वो कौन है. "मेरे कर्ली बाल भी मेरी पहचान थे. कभी राह चलते कोई अजनबी मिलता था तो मेरे बालों से मुझे पहचान कर पूछता था 'तुम पार्क स्ट्रीट वाली पीड़िता हो?' मै घबरा जाती थी. ऐसा लगने लगा था की मेरा खुद का अस्तित्व खत्म होता जा रहा है.", जॉर्डन बताती है.

"आखिरकार एक दिन मैंने ये फैसला किया की बहुत हो गया. मेरे साथ बुरा हुआ, बहुत बुरा हुआ मगर मै अभी ज़िंदा हूँ और लड़ना चाहती हूँ. मै जैसी हूँ वैसे ही लड़ूंगी, न की किसी धुंधली परछाई में रह कर."

ये उसी घटना के दोहरने जैसा था
पार्क स्ट्रीट पीड़िता से वापस सुज़ैट जॉर्डन बनना और भी ज़्यादा घातक था. जॉर्डन याद करती है "घटना के कुछ दिन बाद की हालत जब उसे बिस्तर से उठ कर टॉयलेट तक जाने में अपने पापा का सहारा लेना पड़ता था. मै 37 साल की थी और ये सब मुझे और लज्जित करता था."


वो वही त्रासदी फिर से याद करती है जब वो इस घटना ऍफ़.आई.आर. दर्ज करवाने गयी थी और पुलिस स्टेशन में सिर्फ पुरुष कर्मचारी ही थे. "वो मेरे ऊपर हंस रहे थे. उन्होंने मेरे साथ घटी घटना को गंभीरता से नहीं लिया." वो याद करती है की एक पुलिस वाला जो उस पर कसीदे कस रहा था जॉर्डन के बियर पीने और डिस्को में जाने को लेकर. जॉर्डन का दिल दहल जाता है जब वो उसके साथ हुए मेडिकल टेस्ट्स के बारे सोचती है. बिना कपड़ो के खड़ा रहना, जख्मों का छुआ जाना, तरह तरह के टेस्टस झेलना और स्वेब टेस्टिंग.

वो जब कभी भी ऐसी ही किसी घटना के बारे में सुनती है तो उसे आपबीती याद आ जाती है. "ये सब मुझे पागल कर जाता है. मै दर्द से बुरी तरह से कराह रही थी. ऐसी बेहोशी सी हालत थी की मै अपना शरीर हिला ही नहीं पा रही थी."

"जानने वाले और अजनबी सभी के एक जैसे विचार थे मुझे लेकर. नेताओं ने तो मुझे पेशवर बोल डाला. मुझे ये तक कहा गया कि ये घटना फिक्स थी जो की किसी गलतीवश गतल दिशा में चली गयी." जॉर्डन के केस की तुलना निर्भया के केस के साथ उलटी तरह से करी गयी- बैड विक्टिम vs गुड विक्टिम. मेरी बेटी जब सुबह स्कूल के लिए निकलती थी तो कुछलोग उसे घूरते हुए भद्दे कमेंट करते थे."

चरित्र को लेकर भद्दी टिप्पणिया
"मै 11 साल से सिंगल मदर हूँ. बजाये इसके की लोग मेरे द्वारा निभाए गए माँ और बाप की ज़िम्मेदारी को लेकर लोग मेरी प्रशंसा करें, लोग मुझे कलंक कहते हैं. ओह, वो सिंगल मदर हैं...!! उसके पति ने उसको छोड़ दिया! वो सच में ही पेशेवर होगी." जॉर्डन का कहना है की लोगों को खुद पता नहीं होता की वो क्या बोल रहे हैं. "आप मुझे पेशेवर कह रहे हो जबकि आप मुझे जानते भी नहीं हो."

जॉर्डन का अपनी पहचान को सबके सामने लाने का निर्णय उसके ट्रायल में तेजी लाने जैसा था. "एक वकील ने बोला की मै न्यायलय की पवित्रता को भंग कर रही हूँ. मगर जब कोर्ट के दरवाज़े खुलते हैं, जब दोषी की पूरी फॅमिली बाहर होती है और वो लोग मेरी फोटो अपने मोबाइल से खीचते हैं तब मेरी पवित्रता भंग नहीं होती?"

इस घटना के बाद जॉर्डन की फॅमिली ही उसका कवच बनी रही. उसकी छोटी से बेटी ने ही उसको साहस बंधाया की ये मत सोचो की दुनिया क्या कह रही है. उसकी 76 की दादी ने उसको प्रोत्साहन दिया की वो पुलिस में कंप्लेंन करे और एन.जी.ओ स्वयं ने उसका साथ दिया. मगर ऐसी परिस्थितियों में भावुकता का साथ भी कम पड़ता है.

जॉर्डन जब भी किसी इंटरव्यू के लिए जाती है और जब इंटरव्यू लेने वाला उसके सीवी में NGO का रिफरेन्स देखता है तो वापस दोबारा कॉल नहीं करता है. "आजतक कभी किसी ने मुझे दोबारा कॉल ही नहीं किया", जॉर्डन बताती है. "क्या मै कोई काम नहीं कर सकती? क्या मुझे कुछ नहीं आता है? सिर्फ इस वजह से की मै उस रात नाईट क्लब में गई थी? अगर नाईट क्लब इतने बुरे होते हैं तो उनको बंद कर दो! मैंने कितनी एंटी-डिप्रेशन और स्लीपिंग पिल्स लेना शुरू कर दिया था. हर रात भयावह सपने लेकर आती थी. मै नीद से चिल्ला कर उठ जाती थी. मै अपना ही नुकसान कर रही थी इतनी दवाएं खा कर. अगर मेरे माँ-बाप न होते, अगर मेरे बच्चे मेरा साथ न देते तो मै मर ही जाती."

वापस कोई नहीं पूछता
महिला कार्यकर्ता संतश्री चौधरी ने भी कोशिश करी की जॉर्डन को नौकरी दिलवा सके. उनके अनुसार, "मेरे जो भी कॉन्टेक्ट्स हैं कोलकाता में उसके बाद किसी की नौकरी लगवाना मेरे लिए नहीं बड़ी बात नहीं है. महिला कार्यकर्ता के रूप में मुझे 20 साल हो चुके हैं. मै महिलाओं का सशक्तिकरण करती हूँ उन्हें नौकरी दिलवा कर." उन्होंने कभी भी जॉर्डन की पहचान को किसी से छिपाया नहीं और शायद यही वजह थी की किसी भी कंपनी ने उसे दोबारा कॉल नहीं किया. "वो सभी कहते हैं की वो जॉर्डन को कॉल करेंगे. हमलोग इंतज़ार करते हैं की जॉर्डन को कॉल आयेगी मगर नहीं. कहने को ये लोग मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं."


आखिरकार चौधरी ने जॉर्डन को एक हेल्पलाइन Surviver For Victims of Social Injustice के लिए नियुक्त किया. उसकी सैलरी मामूली सी है. "मुझे अभी भी इंतज़ार है की सुज़ैट कोई कॉल मिलेगी जिससे उसे 60,000/- तक की तनखा मिलेगी क्यों वो इसके योग्य है." चौधरी का ये भी कहना है की वो चाहती तो जॉर्डन के लिए एक चैरिटी भी कर सकती थी जिसमे अपने हर जानने वाले से वो 1000/- तक ले सकती थी मगर उन्हें जॉर्डन को काम पे लगाना ज्यादा उचित लगा. अब उनके अनुसार जॉर्डन अच्छा काम कर रही है और लोगों की मदद कर रही है.

कुछ महीनो पहले बरसात के काम्धुनी नाम के एक गाँव का एक 20 साल का लड़की जो की अपने अपने कॉलेज से घर जा रही थी, एक गैंग के द्वारा अटैक का शिकार हुई. बाद में उसकी मृत्यु भी हो गई. जॉर्डन वहां चौधरी के साथ पीड़ित के परिवार से मिलने गयी थी मगर वो उस युवक की माँ से बात करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई. कुछ दिन बाद महिला कार्यकर्ताओं द्वारा प्रोटेस्ट किया गया जिसमे चौधरी के कहने पर जॉर्डन ने भी हिस्सा लिया.

चौधरी कहती हैं, "मैंने उसको बोला की तुम्हे रोज़ घर से सुज़ैट की तरह निकलना चाहिए न की एक पीडिता की तरह. तुम एक मिसाल हो न की एक पीड़िता. जिन्होंने ये सब किया उनको छिपना चाहिए न की तुम्हे." इस प्रोटेस्ट के दौरान ही जॉर्डन सबके सामने खुल कर आई थी. जॉर्डन उस दिन 300-400 महिलाओं के साथ प्रोटेस्ट पे थी जिनमे से ज़्यादातर उसकी कहानी पहले से जानती थी और ये सब में और भी जोश ला रहा था."मुझे ऐसा लग रहा था की मुझसे कहीं ज्यादा जॉर्डन तैयार है. हम जब पार्क स्ट्रीट से निकले और जब जॉर्डन ने कहा 'हल्ला बोल', ऐसा लगा कुछ अलग ही प्रतीत हो रहा है", चौधरी बताती हैं.

जॉर्डन अब जिंदगी को साधारण रूप से जीने की कोशिश कर रही है. वो ज़िन्दगी की छोटी छोटी खुशियों से फिर के काफी कुछ सीख रही है. परिवार के लिए खाना बनाना, अपनी प्यारी सी बिल्ली के साथ खेलना और अपने पौधों की देखभाल करना उसे अब अच्छा लगता है. जॉर्डन कहती है, "मुझे डिस्को अच्छे लगते हैं. मुझे डांस अच्छा लगता है मगर मै उस दिन के बाद से कभी भी वहां वापस नहीं गई. मेरा मन करता है की मै पार्टी में जाऊं, वैसे ही ड्रेसअप होने का मन करता है मगर बहुत डर लगता है."

ये पूछने पर की क्या वो चाहती है की जिन नेताओं ने उसको लेकर भद्दी बातें करी थी वो माफ़ी मांगे, जॉर्डन कहती है की उसे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. "मेरे मन में उन लोगों के लिए कोई द्वेष नहीं है. मुझे नहीं पता उन्होंने क्या सोच कर ये सब बोला. वो अगर मुझसे माफ़ी मांगना भी चाहते हैं तो मुझे न्याय दिलवाने में मेरी मदद करे. मेरी न सही, मगर हर वो औरत जो मेरे जैसे हालातों से गुज़रती है उसको न्याय दिलाएं".

रेस्टोरेंट में जाने से रोका गया 
सितम्बर, 2014 में सुज़ैट के साथ एक और चौकाने वाली घटना घटी जब उसे कोलकाता के एक मशहूर रेस्टोरेंट में इस वजह से जाने से रोक दिया क्यों की बैंक मैनेजर ने उसे पहचान लिया था की वो पार्क स्ट्रीट केस वाली पीड़िता है. दूसरी तरफ रेस्टोरेंट के मैनेजर दीप्तेन बनर्जी का कहना ये था की उसने जॉर्डन को इस वजह से मना किया क्यों की उसके रेस्टोरेंट में आने से रेस्टोरेंट में हलचल मच सकती थी. मैनेजर के अनुसार सुज़ैट पहले भी अलग अलग लोगों के साथ वहां जा चुकी थी और काफी हंगामा कर चुकी थी और उसके पास इसकी वीडियो फुटेज भी है तभी उसने जॉर्डन को अंदर आने से मना कर दिया. दूसरी तरफ जॉर्डन का कहना ये था की मैनेजर की बातें झूठ हैं , वो पहले सिर्फ एक बार ही इस रेस्टोरेंट में आई है.

जॉर्डन ने अपने साथ हुए इस वीभत्स हादसे को आमिर खान के शो सत्यमेव जयते में भी व्यक्त किया था.

क्राइम पेट्रोल द्वारा ये केस प्रस्तुत किया है. देखने के लिए इस पोस्ट पर जाए:
http://crimepatroldastak.blogspot.com/2012/07/crime-patrol-dastak-37-year-old-rita.html

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