Rani (Played by Nidhi Jha), a 13-14 years girl brings a 3 years baby girl with her to AIIMS (All India Institute of Medical Sciences). Baby condition is critical and doctors are shocked to see her burned and injured throughout her body.

Rani tries to escape after handling them to hospital staff but police and security guards capture her. Rani is saying that it is her own baby and after interrogating her she reveals that this baby girl was brought to her by a guy named Nadeem (real name Rajkumar played by Manish Raj).

Police is now looking for Nadeem. In the meantime doctors (Lead played by Shakti Singh) gives this baby girl name Baby Tara (Originally doctors gave her name Falak). Tara's condition is becoming critical day by day.

Where does Tara come from?
Who is Nadeem?
Who is Rani?
And where are mother and father of Tara?


VIDEO
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दिल्ली का बेबी फलक केस: एक दिल दहला देने वाली सच्ची कहानी

भारतीय राजधानी दिल्ली में साल 2012 की शुरुआत में एक ऐसी घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया, जिसने न सिर्फ मानवीय दरिंदगी की सबसे निचली सीमा देखी, बल्कि सिस्टम की विफलताओं और एक बच्ची की जीवटता की अद्भुत मिसाल भी पेश की। यह कहानी है दो साल की एक बच्ची 'फलक' की, जिसे 'बेबी फलक' के नाम से जाना गया।

कौन थी बेबी फलक?

फलक (जिसका नाम अस्पताल में रखा गया) उस समय महज दो साल की एक मासूम बच्ची थी। जनवरी 2012 में, उसे गंभीर रूप से चोटिल अवस्था में एक व्यक्ति दिल्ली के एम्स (AIIMS) अस्पताल लेकर आया। उसकी हालत इतनी खराब थी कि डॉक्टरों के लिए भी यह देखना मुश्किल था कि वह बच पाएगी या नहीं।

वह भीषण हालत क्या थी?

जब फलक एम्स पहुंची, उसकी स्थिति एक डरावनी फिल्म से कम नहीं है:

  • शरीर पर गहरी चोटें: उसके शरीर पर कई जगह मानव काटने के निशान थे।
  • सिर की फ्रैक्चर: उसकी खोपड़ी में फ्रैक्चर था और दिमाग को नुकसान पहुंचा था।
  • चेहरे पर जलने के निशान: उसके गाल और होंठों पर सिगरेट से जलने के निशान थे।
  • बाजू में फ्रैक्चर: उसकी एक बाजू टूटी हुई थी।
  • संक्रमण: उसे बैक्टीरियल मेनिनजाइटिस और दिल और फेफड़ों में संक्रमण था।
  • कुपोषण: वह गंभीर रूप से कुपोषित थी।


यह सब देखकर कोई भी यही सोचता कि इस मासूम के साथ किसी दानव ने व्यवहार किया है।

जांच से सामने आया झकझोर देने वाला सच

पुलिस जांच ने इस केस की परतें खोलनी शुरू कीं और एक ऐसा नेटवर्क सामने आया जो हैरान कर देने वाला था। फलक की कहानी की शुरुआत उसकी मां से हुई।

  1. मां का रोल: फलक की मां, मुस्कान (बदला हुआ नाम), एक नाबालिग थी जिसने अपने पति को छोड़कर एक दूसरे व्यक्ति के साथ भागने का फैसला किया। वह फलक और अपने दूसरे बच्चे को लेकर दिल्ली आ गई।
  2. ट्रैफिकिंग का जाल: दिल्ली में, मुस्कान की मुलाकात एक ऐसे युवक राजकुमार (14 साल का) से हुई, जिसने उसे ऑनलाइन डेटिंग के लिए ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। राजकुमार ने ही मुस्कान को एक और युवक, मनोज के साथ रहने के लिए मजबूर किया।
  3. बच्चों से छुटकारा: मनोज ने मुस्कान से कहा कि वह फलक और उसके भाई को किसी अनाथालय में छोड़ आएगा। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। बल्कि, उसने फलक के भाई को बेच दिया और फलक को अपनी पत्नी, कमलजीत के पास छोड़ दिया।
  4. अंतिम पीड़ादायक पड़ाव: कमलजीत, जो खुद एक सेक्स वर्कर थी, ने फलक की देखभाल करने का दावा किया। लेकिन असल में, वही वह शख्स थी जिसने फलक के साथ अमानवीय व्यवहार किया, उसे भूखा रखा, मारा-पीटा और यहां तक कि उसे अकेले कमरे में बंद करके छुट्टियों पर चली गई। फलक की देखभाल करने के लिए कोई नहीं था।

जिस व्यक्ति ने फलक को अस्पताल लाया, वह राजकुमार था। वह फलक को कमलजीत के घर से ले आया जब उसकी हालत बेहद गंभीर हो गई।

पीड़ितों और आरोपियों की सूची

इस पूरे मामले में कई लोग शामिल थे:

  • पीड़ित: बेबी फलक (2 वर्ष), उसका भाई (जिसे बेच दिया गया), और उनकी मां मुस्कान।
  • मुख्य आरोपी:
    • कमलजीत (मनोज की पत्नी) - मुख्य यातनादायक
    • मनोज - जिसने फलक के भाई को बेचा
    • राजकुमार - जिसने मुस्कान को ब्लैकमेल किया और फलक को अस्पताल लाया
    • मुस्कान (फलक की मां) - लापरवाही और बच्चों को छोड़ने का आरोप

फलक की लड़ाई और दुखद अंत

एम्स के डॉक्टरों और नर्सों ने फलक के लिए जी-जान से कोशिश की। पूरे देश ने उसके लिए प्रार्थनाएं कीं। कई सर्जरी हुईं और धीरे-धीरे उसकी हालत में सुधार होने लगा। वह चलने-फिरने लगी, खिलौनों से खेलने लगी और मुस्कुराने लगी। ऐसा लग रहा था कि वह इस भीषण तूफान को पार कर लेगी।

लेकिन, लगभग दो महीने तक अस्पताल में रहने के बाद, 15 मार्च, 2012 को दिल्ट के कारण उसकी मृत्यु हो गई। उसकी मौत ने पूरे देश को एक बार फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया।

केस का परिणाम और सामाजिक प्रभाव

  • कानूनी कार्रवाई: सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला। कोर्ट ने मनोज और कमलजीत को उम्रकैद की सजा सुनाई। राजकुमार को तीन साल की सजा हुई क्योंकि वह नाबालिग था। मां मुस्कान को जमानत मिल गई थी।
  • सामाजिक जागरूकता: बेबी फलक केस ने बच्चों के खिलाफ होने वाली हिंसा, मानव तस्करी, और बाल संरक्षण कानूनों में कमियों पर एक राष्ट्रीय बहस छेड़ दी।
  • बाल अधिकारों पर फोकस: इस मामले ने सरकार और नागरिक समाज संगठनों को बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा के लिए और मजबूती से काम करने के लिए प्रेरित किया।

Reveal full story here with this cruel reality of Human Trafficking in India. The link below has coverage in Hindi and English with NDTV coverage of the case in English and Hindi
www.crimestories.co.in/2012/02/baby-falak-case-failure-of-child.html
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